बुधवार 4 नवंबर 2026 - 16:34
फ्रांस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज; सैकड़ों स्कूल बंद, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी

फ्रांस में सरकार की कोशिशों के बावजूद छात्रों का विरोध आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। नए शैक्षणिक सप्ताह की शुरुआत में भी कई स्कूलों में विरोध प्रदर्शन जारी रहे और शिक्षण संस्थानों के प्रवेश द्वार बंद रखे गए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस में सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद छात्रों का विरोध आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। नए शैक्षणिक सप्ताह की शुरुआत में भी कई स्कूलों में प्रदर्शन जारी रहे और शिक्षण संस्थानों के प्रवेश द्वारों को बंद रखा गया।

छात्रों के एक संगठन के अनुसार, 3 नवंबर को लगभग 500 हाई स्कूलों के प्रवेश द्वार बंद थे, जबकि सरकार ने यह संख्या केवल 48 बताई है। प्रदर्शनों के दौरान पेरिस, टूलूज़, रेनेस और ले आव्र सहित विभिन्न शहरों में दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें कई छात्र भी शामिल हैं। ले आव्र में गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग को लेकर कई विरोध सभाएं भी आयोजित की गईं।

पेरिस में विभिन्न विश्वविद्यालयों के सैकड़ों छात्रों ने पुलिस की भारी तैनाती और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध के बावजूद विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

पुलिस की कार्रवाई का दायरा अब शैक्षणिक कर्मचारियों तक भी पहुंच गया है। मोंपेलिये के जीन मोने हाई स्कूल की एक नर्स को सख्ती से गिरफ्तार किया गया, जबकि ले ला शहर में एक शैक्षणिक सहायक को प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन करने के दौरान हिरासत में ले लिया गया।

दूसरी ओर, स्कूलों के प्रबंधक भी विरोध प्रदर्शन समाप्त कराने के लिए पुलिस की मदद ले रहे हैं। छात्रों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आई है और पुल अलवार हाई स्कूल के शैक्षणिक कर्मचारियों को भी प्रशासनिक जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

फ्रांस के गृहमंत्री ने पुलिस की सख्त कार्रवाई का बचाव किया

फ्रांस के गृहमंत्री लॉरां नूनेज़ ने 2 नवंबर 2026 को संसद में हुई सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सभी संसाधनों, जिनमें आंसू गैस और हथगोले भी शामिल हैं, के इस्तेमाल का बचाव किया। उन्होंने पुलिस हिंसा और इन हथियारों से पैदा होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बावजूद इनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने या इसकी समीक्षा करने की मांग स्वीकार नहीं की।

दूसरी ओर, सरकार ने विरोध आंदोलन को बदनाम करने के लिए संसदीय जांच समिति का भी सहारा लिया है। यह समिति 17 अक्टूबर की घटनाओं के एक दिन बाद गठित की गई थी। हालांकि, इस पर आरोप है कि वह प्रदर्शनकारियों को अतिवामपंथी विचारधारा से जुड़ा बताकर विरोध आंदोलन की छवि खराब करने का प्रयास कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का उद्देश्य विरोध आंदोलन को समाप्त कराकर छात्रों को दोबारा कक्षाओं में लौटाना है, जबकि प्रदर्शनकारी पुलिस की हिंसा और गिरफ्तारियों के खिलाफ अपना विरोध जारी रखे हुए हैं।

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